Tuesday, December 22, 2009

जौहरी बनिये की याद...

आम आदमी के हालात सुधारेगे.... और आम आदमी की खास सरकार है....सब कुछ आम आदमी के लिए है लेकिन आम आदमी फिर भी परेशान है घऱ से नकले तो बसो मे बढा हुआ किराया,आटो मे बैठे तो मीटर से नही जाऊगा और फिर उसकी मनमानी भी...आफिस जाए तो रिशेशन का डर कही नौकरी ना जली जाए, शाम होते होते घऱ की रसोई की चिंता चीनी 45 रूपये किलो... मुझे याद है मेरे गाव मे जौहरी बनिये(मै उन्हे बाबा कहा करता था) की दूकान से मै चीनी लाया करता था तो 11 रूपये किलो आती थी ज्यादा समय नही हुआ इस बात को मै उस वक्त बाहरवी क्लास मे था लेकिन अब 8 साल बाद भी मुझे जौहरी बिनिये कि याद आती है वो इस लिए नही कि उनसे कोई मेरा लगाव है बल्कि इस उम्मीद के साथ की अब भी वो मुझे चीनी उसी दाम पर देगे... हालाकि जौहरी बनिया अब इस दुनिया मे नही रहा...चीनी की बात मै इस लिए कर रहा हू क्योकि हाल ही मै मैने खरीदी थी.....इसी तरह का हाल दाल रोटी का है ...अब सिर्फ कहने को रह गया कि आम आदमी दाल रोटी खाता है...मेरे खुद के बजट से तो बाहर हो गयी है ये हालात तो राजधानी मे नौकरी करने वाले मेरे जैसा नाजाने कितने भाईयो के है ...लेकिन उस किसान के बारे मे कोई नही सोचता जो दिन रात खेतो मे काम करता है आपके और मेरे लिए अनाज पैदा करता है लेकिन खुद रोटी भी सोच के खाता है... इसी तरह का हाल हरियाणा के पानीपत जिले मे नन्हेडा गाव के रहने वाले करण सिंह का है लोग उसे करणा कहते है पेशे से किसान है पाच साल पहले खेती और दूध बेचने से आसानी से गुजारा हो जाया करता था लेकिन दाल रोटी खाना उसके लिए भी मुश्किल हो गया मैने कई बार देखा सुबह जब नाश्ता करते है तो चुल्हे के पास बैठकर रोटी के ऊपर चटनी ऱखकर खा लेते है और जहा तक मुझे याद है पाच साल पहले वो कम से कम हफ्ते एक बार देसी घी मे बना हुआ बेसन का हलवा खा लिया करते थे लेकिन जब से होश सभाला है मैने कभी उन्हे हलवा खाते नही देखा...जवानी मे पहलवान रहा करणे का शरीर अब ठलने लगा है...ये कोई एक करण सिह की कहानी नही है ना जाने कितने करण सिह महगाई की इस मार मे खाने का जायका भूल गए है....ये हालात तो हरियाणा जैसे राज्य की है जहा प्रति व्यकित इनकम देश मे सबसे ज्यादा है और राजधानी से सटी हुई सीमा...बुदेलखण्ड औऱ विदर्भ जैसे इलाको के क्या हालात है ये शायद मे नही सोच सकता...फटी हुई धरती इंतजार करती है बारिश की बूंदो का,चूल्हे को इंतजार है लकडी कब आऐगी.और मुरझे हुए चेहरो को फिर भी विश्वास है कि आम आदमी की खास सरकार उनके लिएए जरूर आपना पिटारा खोलेगी और हम फिर कह सकेगे कि दाल रोटी खा कर गुजारा कर रहा हू क्योकि मै आम आदमी हू....

Tuesday, December 15, 2009

हरियाणा की ममता

8 दिस्मबर को घर गया था बहाना था मेरे रिश्तेदार की शादी हरियाणा के जींद जिले का भुसलाना गांव मेरे मामा का घर है....लगभग दोपहर एक बजे की बात है मेरा फोन बजा लोकल नम्बर से फोन था लडकी की आवाज आई नमस्ते सर मै ममता बोल रही हू कैथल से (हरियाणा का ठीक ठाक जिला है)मुझे आपकी मदद चाहिए मेने कहा बताईए मै आपकी क्या मदद कर सकता हू...तो उस लडकी ने कहा मै माउट ऐवरेस्ट पर जाना चाहती हू मै अंदर ही अंदर सोच रहा था कि मेरा माउट ऐवरेस्ट से क्या सम्बध है....तो मैने दोबारा पूछा कि इसमे मै आपके लिए क्या कर सकता हू तो ममता ने कहा सर वहा जाने के लिए 21 लाख रूपयो की जरूरत है और मै एक साधारणा परिवार से सम्बध रखती हू हम लोग पाच भाई बहन है और ममता ने आखिर मे दबी आवाज मे कहा कि मेरे पिता भी नही है....इस बात के बाद सच कहू तो मै थोडा सोचने पर मजबूर हुआ कि मै इस लडकी की मदद कैसे करू तो जैसा ममता ने बताया था कि पाच भाई बहन है और पिता भी नही तो मीडिया के हिसाब से सोचा तो लगा कि खबर बेच सकता हू तो मैने एक दम से ममता को कहा... ठीक है मै 10 तारीक को दिल्ली चला जाऊगा वहा आके मिलो मै बात करता हू (मैने ये नही कहा कि बोस से बात करता हू क्योकि उसे कही ये ना लगे कि वो छोटे आदमी से बात कर रही थी हरियाणा मे अक्सर ऐसा होता है मै जानता हू क्योकि मै भी वही का रहने वाला हू)10 को वापस आफिस आया शाम हो चुकी थी और सबसे पहले मैने देखा की बोस कहा है उनकी डेस्क पर गया जैसै अक्सर होता है वहा नही मिले ममता भी आफिस आ चुकी थी और मेरे अंदर एक अजीब सा डर था पता नही क्या होगा बोस मानेगे या नही इससे पहले मै आपको एक बात और बताता हू कि हमारे आफिस के गेस्ट रूम मे इडिया और भारत की महिलाओ का मिलन भी हुआ कैथल की साधारण सी लडकी ममता को जब मैने गेस्ट रूम मे बैठने को कहा तो अंदर देखा कि ट्रम मूवी की पूरी टीम भी वहा बैठी हुई थी मेकअप से लथपथ दो सुंदर चेहरे बैठे हुए थे और उन्हे देखकर ममता बार बार आपने सूट को देख रही थी शायद उसके मन मे भाव हो ये भी मेरी बहन है पर मेरा क्या कसूर मै कैथल मे और ये मम्बई मे पैदा हुई....उसके बाद बोस वही पर आ गए उन्हे शायद पहले ही जानकारी मिल चुकी थी मैने ममता को मिलवाया हमेशा की तरह बोस ने कहा हा बेटा बताओ तो ममता ने जिस तरह अपनी बात शुरू की मुझे लगा कि अब कुछ नही हो सकता उसने सबसे पहले कहा कि मुझे 21 लाख की जरूरत है मै माउट ऐवरेस्ट पर जाना चाहती हू उसके बाद जब मैने बोस का चेहरा देखा तो उस पर हल्की सी मुसकुराहट थी मैने हल्के से बोस के कान मै कहा सर महिला है ,अरमान है,आसू है बीक सकता है....थोडी देर बाद बोस ने कहा ठीक है रविवार को चलाओ और फोन लाईन खोल देना... उस वक्त मेरे चेहरे पर भी थोडा सूकून था जो मैने बाद मै महसूस किया..हमारा हरियाणा का चैनल सिर्फ 3 महीने पहले शुरू हुआ था और उसकी लोकप्रियता ज्यादा बढ चुकी थी अक्सर ऐसा नही होता आज के इस दौर मे....अब मेरे जहन मे बार बार एक ही सवाल की क्या ममता के लिए फोन आऐगे ये मैने अपने एंकर से भी कहा यार पता नही क्यो मुझे डर लग रहा है...उसके बाद शाम 6बजे रविवार की बजाए हमने शनिवार को ही ममता का प्रोग्राम रखा... मै खुद जा के पीसीआर मे खडा हो गया और फिर वही सोच रहा था कि फोन आएगे या नही शुरू के 5 मिनट बीत चुके थे उसके बाद रोहित(एंकर) ने खुद से ही कहा दिया की हमारे सात एक कालर सिरसा से है हालाकि कोई था नही और उसके बाद घंटी बजने का दौर शुरू हुआ वो सही मायने मे आजीब तरह की खुशी थी ये तो मै आपको नही बताउगा कि ममता कि हम कितनी मदद कर पाए....पत्रकारिता के इस छोटे से कैर्यर मे पहली बार लगा कि मेरी नैतिकता जिंदा है(कुछ दिन पहले अमिलाभ वच्चन की एकलव्य फिल्म देख रहा था उसमे बच्चन साहब कहते है कि अगर मैने अपना धर्म नही निभाया तो मेरी 7 पुशते नरग मे जाएगी).....महज एक स्टोरी को लेकर इतना डर कभी नही लगा जितना हरियाणा की ममता... को लेकर लगा....अभी भी सोच रहा हू क्या एक स्टोरी थी या कुछ और....आप को समझ आए तो मुझे भी बताना प्लीज.....