Tuesday, December 15, 2009

हरियाणा की ममता

8 दिस्मबर को घर गया था बहाना था मेरे रिश्तेदार की शादी हरियाणा के जींद जिले का भुसलाना गांव मेरे मामा का घर है....लगभग दोपहर एक बजे की बात है मेरा फोन बजा लोकल नम्बर से फोन था लडकी की आवाज आई नमस्ते सर मै ममता बोल रही हू कैथल से (हरियाणा का ठीक ठाक जिला है)मुझे आपकी मदद चाहिए मेने कहा बताईए मै आपकी क्या मदद कर सकता हू...तो उस लडकी ने कहा मै माउट ऐवरेस्ट पर जाना चाहती हू मै अंदर ही अंदर सोच रहा था कि मेरा माउट ऐवरेस्ट से क्या सम्बध है....तो मैने दोबारा पूछा कि इसमे मै आपके लिए क्या कर सकता हू तो ममता ने कहा सर वहा जाने के लिए 21 लाख रूपयो की जरूरत है और मै एक साधारणा परिवार से सम्बध रखती हू हम लोग पाच भाई बहन है और ममता ने आखिर मे दबी आवाज मे कहा कि मेरे पिता भी नही है....इस बात के बाद सच कहू तो मै थोडा सोचने पर मजबूर हुआ कि मै इस लडकी की मदद कैसे करू तो जैसा ममता ने बताया था कि पाच भाई बहन है और पिता भी नही तो मीडिया के हिसाब से सोचा तो लगा कि खबर बेच सकता हू तो मैने एक दम से ममता को कहा... ठीक है मै 10 तारीक को दिल्ली चला जाऊगा वहा आके मिलो मै बात करता हू (मैने ये नही कहा कि बोस से बात करता हू क्योकि उसे कही ये ना लगे कि वो छोटे आदमी से बात कर रही थी हरियाणा मे अक्सर ऐसा होता है मै जानता हू क्योकि मै भी वही का रहने वाला हू)10 को वापस आफिस आया शाम हो चुकी थी और सबसे पहले मैने देखा की बोस कहा है उनकी डेस्क पर गया जैसै अक्सर होता है वहा नही मिले ममता भी आफिस आ चुकी थी और मेरे अंदर एक अजीब सा डर था पता नही क्या होगा बोस मानेगे या नही इससे पहले मै आपको एक बात और बताता हू कि हमारे आफिस के गेस्ट रूम मे इडिया और भारत की महिलाओ का मिलन भी हुआ कैथल की साधारण सी लडकी ममता को जब मैने गेस्ट रूम मे बैठने को कहा तो अंदर देखा कि ट्रम मूवी की पूरी टीम भी वहा बैठी हुई थी मेकअप से लथपथ दो सुंदर चेहरे बैठे हुए थे और उन्हे देखकर ममता बार बार आपने सूट को देख रही थी शायद उसके मन मे भाव हो ये भी मेरी बहन है पर मेरा क्या कसूर मै कैथल मे और ये मम्बई मे पैदा हुई....उसके बाद बोस वही पर आ गए उन्हे शायद पहले ही जानकारी मिल चुकी थी मैने ममता को मिलवाया हमेशा की तरह बोस ने कहा हा बेटा बताओ तो ममता ने जिस तरह अपनी बात शुरू की मुझे लगा कि अब कुछ नही हो सकता उसने सबसे पहले कहा कि मुझे 21 लाख की जरूरत है मै माउट ऐवरेस्ट पर जाना चाहती हू उसके बाद जब मैने बोस का चेहरा देखा तो उस पर हल्की सी मुसकुराहट थी मैने हल्के से बोस के कान मै कहा सर महिला है ,अरमान है,आसू है बीक सकता है....थोडी देर बाद बोस ने कहा ठीक है रविवार को चलाओ और फोन लाईन खोल देना... उस वक्त मेरे चेहरे पर भी थोडा सूकून था जो मैने बाद मै महसूस किया..हमारा हरियाणा का चैनल सिर्फ 3 महीने पहले शुरू हुआ था और उसकी लोकप्रियता ज्यादा बढ चुकी थी अक्सर ऐसा नही होता आज के इस दौर मे....अब मेरे जहन मे बार बार एक ही सवाल की क्या ममता के लिए फोन आऐगे ये मैने अपने एंकर से भी कहा यार पता नही क्यो मुझे डर लग रहा है...उसके बाद शाम 6बजे रविवार की बजाए हमने शनिवार को ही ममता का प्रोग्राम रखा... मै खुद जा के पीसीआर मे खडा हो गया और फिर वही सोच रहा था कि फोन आएगे या नही शुरू के 5 मिनट बीत चुके थे उसके बाद रोहित(एंकर) ने खुद से ही कहा दिया की हमारे सात एक कालर सिरसा से है हालाकि कोई था नही और उसके बाद घंटी बजने का दौर शुरू हुआ वो सही मायने मे आजीब तरह की खुशी थी ये तो मै आपको नही बताउगा कि ममता कि हम कितनी मदद कर पाए....पत्रकारिता के इस छोटे से कैर्यर मे पहली बार लगा कि मेरी नैतिकता जिंदा है(कुछ दिन पहले अमिलाभ वच्चन की एकलव्य फिल्म देख रहा था उसमे बच्चन साहब कहते है कि अगर मैने अपना धर्म नही निभाया तो मेरी 7 पुशते नरग मे जाएगी).....महज एक स्टोरी को लेकर इतना डर कभी नही लगा जितना हरियाणा की ममता... को लेकर लगा....अभी भी सोच रहा हू क्या एक स्टोरी थी या कुछ और....आप को समझ आए तो मुझे भी बताना प्लीज.....

5 comments:

  1. क्या बात है...
    लेकिन

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  2. 25000 यूएस डॉलर का खर्च एक शख्स के एवरेस्ट पर्वतारोण का होता है। ऐसे महंगे शौक क्यों रखें.... अगर आप कोई दूसका काम करके पैसे कमा रहे हैं तो खुद के रुपयों से ऐसा करें। दूसरों से मदद न मांगे...। आप तीर तो मार नहीं रहे...।
    25000 डॉलर में कई भूखों को अन्न मिल जाएगा....।
    एवरेस्ट की चढ़ाई तो वैसे की पर्यावरण खराब कर रही है।

    माफी चाहता हूं मेरे विचार हैं... दिस से

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  3. बहुत खूब आदेश ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है..इसी तरह लिखते रहिए.. आप की सोच में मौलिकता है..इसे कायम रखें ..ये आपके और मीडिया दोनो के लिए ज़रूरी है..दिल की बात को बखूबी शब्दों में आपने बांधा है..

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  4. good effort. i think others should take a lesson from u.

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  5. sab se pehle .....ye mamta .....evrest pe ja kar kar kya legi...pehli baat evrest par jana koi bachon ka khel nahi......agar itna hi shonk hai to apni jabh se paisa do or chale jao.....21 lakh koi kam rakam thode hi hai.....21 lakh me to kai garibon ko khana or pehna ne ko kapda mil sakta hai.......21 lakh 1 insan par jo ki siraf apne shounk ke liye kharch karna chahta hai ....us ko 21 lakh dena koi.......samjdari ki baat nahi hai..............this is my thinking

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